
सक्ती / जिले में अवैध फ्लाई ऐश (राखड़) डंपिंग की शिकायत पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उद्योग प्रबंधन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की है। ग्राम पंचायत मसानियाकला के आश्रित ग्राम मसानियाखुर्द में की जा रही डंपिंग को लेकर शिकायत मिलने पर कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में त्वरित जांच कराई गई।
कलेक्टर के निर्देश पर सक्ती एसडीएम अरुण कुमार सोम ने क्षेत्रीय कार्यालय छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के माध्यम से स्थल निरीक्षण कराया।
जांच में क्या मिला?
जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित स्थल पर फ्लाई ऐश को भूमि तल से ऊपर तक डंप किया गया था, जबकि नियमानुसार चारों ओर बण्ड (घेरा) का निर्माण नहीं किया गया था। इसके अलावा डंप की गई राखड़ का समतलीकरण नहीं किया गया और उसके ऊपर मिट्टी की परत भी नहीं बिछाई गई।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि डंपिंग स्थल के पास स्थित अनुसूचित जनजाति बालक आश्रम की बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा राखड़ परिवहन के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया। वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था भी स्थल पर नहीं पाई गई, जिससे पर्यावरणीय जोखिम की आशंका बढ़ गई।
₹20,000 प्रतिदिन की दर से जुर्माना
जांच दल ने निष्कर्ष निकाला कि मेसर्स आरकेएम पॉवरजेन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया कार्य फ्लाई ऐश उपयोग से संबंधित जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्तों तथा भारत सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के प्रावधानों के विपरीत है। इसके मद्देनजर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार उद्योग पर पत्र जारी होने की तिथि से नियमानुसार कार्य पूर्ण होने तक 20,000 रुपये प्रतिदिन की दर से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है।
उद्योग प्रबंधन को निर्देश दिया गया है कि संबंधित भू-भराव स्थल पर सभी सुधारात्मक कार्य तत्काल सुनिश्चित कर इसकी सूचना संबंधित कार्यालय को प्रस्तुत करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि में वृद्धि की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उद्योग प्रबंधन की होगी।
सुधारात्मक कार्य शुरू
फिलहाल संबंधित उद्योग द्वारा स्थल पर सुधारात्मक कार्य तेज गति से किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि आगे भी पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।





