Chhattisgarh: कोरिया का जल संरक्षण मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण, पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में की सराहना
जनभागीदारी से जल क्रांति: कोरिया मॉडल को देशभर में अपनाने की तैयारी, CM विष्णु देव साय ने बताया प्रेरक पहल

रायपुर, 29 मार्च / छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में जल संरक्षण को लेकर किया गया अभिनव प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम Mann Ki Baat में “कोरिया मॉडल” की सराहना करते हुए इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया है।

राज्य के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने भी इस पहल को जनआंदोलन बताते हुए कहा कि “जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प है।”
क्या है कोरिया मॉडल?
कोरिया जिले में “कैच द रेन” और राज्य शासन के “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत “आवा पानी झोंकी” अभियान चलाया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर जन आंदोलन का रूप दे दिया।
इस मॉडल के तहत:
- किसानों ने अपनी जमीन का 5% हिस्सा जल संरचनाओं के लिए दिया
- छोटे-छोटे तालाब, डबरी और सोखता गड्ढों का निर्माण
- मनरेगा के तहत व्यापक जल संरचनाएं विकसित
जनभागीदारी बनी ताकत
- महिलाएं बनीं नीर नायिका
- युवा बने जल दूत
- ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना लागू
इससे गांवों में लोग खुद जल संरक्षण के काम में भागीदार बने।
2025 की बड़ी उपलब्धियां
- 2.8 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) जल का भूजल में पुनर्भरण
- यह मात्रा लगभग:
- 230+ बड़े तालाब के बराबर
- 1800+ डबरियों के बराबर
भूजल स्तर में सुधार
Central Ground Water Board (CGWB) की रिपोर्ट के अनुसार:
👉 2025 में कोरिया जिले में भूजल स्तर 5.41 मीटर तक बढ़ा
2026 में तेज प्रगति
- 20,612 से अधिक कार्य पूर्ण या प्रगति पर
- 17,229 सामुदायिक कार्य
- 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएं
कलेक्टर का बयान
जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा:
“कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज खुद आगे आता है, तो जल संरक्षण स्थायी बनता है।”
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने भी इस मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य बताया है। इससे साफ है कि कोरिया मॉडल अब पूरे देश के लिए रोल मॉडल बनता जा रहा है।
कोरिया मॉडल यह साबित करता है कि जब जनभागीदारी + वैज्ञानिक योजना + प्रशासनिक नेतृत्व साथ आते हैं, तो जल संरक्षण केवल योजना नहीं बल्कि जन आंदोलन बन जाता है।





