नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा की वापसी: बंद पड़े 123 स्कूल फिर से खुले, किताबों की सरसराहट ने दबाई बंदूक की आवाज
सुकमा में शिक्षा का नया सवेरा, 2006 में बंद हुए सभी स्कूल अब फिर से संचालित — बच्चों के सपनों को मिल रही नई उड़ान

रायपुर, 25 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां कभी बंदूक की गूंज सुनाई देती थी, वहीं अब स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई, ककहरा और किताबों की सरसराहट गूंज रही है। सरकार और सुरक्षाबलों के संयुक्त प्रयासों से शिक्षा की नई अलख जगी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुकमा जिले में वर्षों से बंद पड़े स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है। वर्ष 2006 में माओवादी प्रभाव और सलवा जुडूम आंदोलन के चलते जिले के कुल 123 स्कूल बंद हो गए थे, जिनमें 101 प्राथमिक और 21 माध्यमिक विद्यालय शामिल थे। अब प्रशासन की सतत कोशिशों से ये सभी स्कूल दोबारा संचालित हो चुके हैं।
आज स्थिति यह है कि जिले में एक भी ऐसा स्कूल नहीं बचा है जो नक्सल प्रभाव के कारण बंद हो। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार
जिले में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया गया है।
- 16 पोटा केबिन (आवासीय विद्यालय) संचालित
- 6,722 छात्र कर रहे अध्ययन
- 16 छात्रावासों में 1,389 विद्यार्थी
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 800 छात्राएं लाभान्वित
नियद नेल्ला नार योजना” से नई उम्मीद
वर्ष 2024-25 में “नियद नेल्ला नार योजना” के तहत:
- 7 नए प्राथमिक स्कूल खोले गए
- 210 बच्चों ने लिया प्रवेश
- 19 और स्कूल खोलने का प्रस्ताव तैयार
बदलाव की नई कहानी
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह बदलाव सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास और विकास की नई नींव भी रख रहा है।
जो बच्चे कभी डर के कारण स्कूल नहीं जा पाते थे, आज वही बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे हैं और तकनीकी कौशल सीख रहे हैं।
“पहले और अब” की तस्वीरें इस बदलाव को साफ दर्शाती हैं — जहां कभी डर था, वहां अब उम्मीद है।





