
22 जनवरी राम मंदिर के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के इतिहास में 22 जनवरी 2024 की तिथि स्वर्णाक्षरों में अंकित हो चुकी है। इसी दिन पांच सौ वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई और भव्य राम मंदिर में रामलला का भव्य पदार्पण हुआ।

राम मंदिर विवाद का पटाक्षेप 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से हुआ, जिसमें रामलला के पक्ष में निर्णय देते हुए भव्य मंदिर निर्माण का आदेश दिया गया। साथ ही कोर्ट के निर्देश पर एक स्वतंत्र ट्रस्ट के गठन का भी आदेश हुआ। इसके अनुपालन में 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अस्तित्व में आया और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई।
इसके पश्चात 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया। ऐतिहासिक क्रम को आगे बढ़ाते हुए 22 जनवरी 2024 को स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला का नेत्रोन्मिलन एवं प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस आयोजन को ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ नाम दिया। ट्रस्ट के निर्णय के अनुसार अब इस पर्व की वर्षगांठ ग्रेगोरियन कैलेंडर के बजाय हिन्दू पंचांग के अनुसार मनाई जाएगी। इसी कारण वर्ष 2025 में प्रतिष्ठा द्वादशी दो बार मनाई गई—
- पहली बार 11 जनवरी 2025
- दूसरी बार 31 दिसम्बर 2025
इन आयोजनों में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि रहे।
इससे पूर्व 25 नवम्बर (विवाह पंचमी) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर में ध्वजारोहण कर विश्व को सनातन संस्कृति की ध्वज पताका फहराने का संदेश दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि पांच सौ वर्षों तक लोकतांत्रिक तरीके से चले राम मंदिर आंदोलन जैसी मिसाल विश्व में कहीं और नहीं मिलती।
दो बार प्रतिष्ठा द्वादशी के आयोजन के चलते 22 जनवरी को इस वर्ष कोई विशेष कार्यक्रम निर्धारित नहीं किया गया है। हालांकि, वसंत पंचमी को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां जारी हैं।
इसी क्रम में राम मंदिर के द्वितीय तल पर निर्माणाधीन रामायण ग्रंथालय में विशेष पूजन आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी द्वारा श्रीमद् वाल्मीकि रामायण की शास्त्रीय टीका की लगभग 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि स्थापित की जाएगी।
यह पांडुलिपि पूर्व में प्रधानमंत्री संग्रहालय की कार्य परिषद के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र को सौंपी गई थी, जिसे अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अयोध्या लेकर आए हैं।
इसी सिलसिले में बुधवार को राम मंदिर परिसर में पदाधिकारियों की मैराथन बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी धार्मिक आयोजनों और व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।





