छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Liquor Scam: जेल से बाहर आएंगे पूर्व मंत्री कवासी लखमा, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत

नई दिल्ली / रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी। करीब एक साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद अब कवासी लखमा के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई ये सख्त शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। वे केवल कोर्ट में पेशी के लिए ही छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा। अपना पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर राहत वापस ली जा सकती है।

ढाई घंटे चली सुनवाई, फिर मिला फैसला

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को लेकर करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कवासी लखमा को जमानत देने का आदेश दिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से आरोप लगाया गया कि कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के अहम सदस्य थे और उनके निर्देश पर ही पूरा नेटवर्क काम करता था। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया।

15 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी ने कवासी लखमा को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू (EOW) ने भी उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी के बाद से वे जेल में बंद थे। हाल ही में ईडी ने इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल की है।

हर महीने 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप

ईडी के अनुसार, यह शराब घोटाला उस समय हुआ जब राज्य में भूपेश बघेल सरकार थी और कवासी लखमा आबकारी मंत्री थे।
आरोप है कि शराब नीति में बदलाव कर माफियाओं को फायदा पहुंचाया गया। कवासी लखमा को इस सिंडिकेट से हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन मिलता था।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। ईडी ने एसीबी में दर्ज FIR में दावा किया है कि घोटाले की राशि 3,200 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत रही। ईडी के अनुसार, तत्कालीन सरकार के दौरान
IAS अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

Related Articles

Back to top button