घर में घुसकर वृद्ध की हत्या और लूट, दो आरोपियों को आजीवन कारावास

जांजगीर-चांपा के चांपा में घर में घुसकर वृद्ध डेयरी संचालक की हत्या और लूट के मामले में कोर्ट ने दो आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
जांजगीर-चांपा। जिले के चांपा थाना क्षेत्र में घर में घुसकर वृद्ध डेयरी संचालक की हत्या और सोने-चांदी के आभूषण लूटने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सेशन जज जांजगीर जयदीप गर्ग ने आरोपी दीपक यादव और मिर्जा शाहिद बेग को हत्या, लूट और घर में घुसने के अपराध में दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 302/34 और 397 के तहत आजीवन कारावास एवं ₹10-10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अलावा धारा 450 के तहत दोनों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10-10 हजार अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है।
घर में मृत मिले थे डेयरी संचालक
मामला 26 जून 2024 की रात का है। शंकर नगर चांपा निवासी डेयरी संचालक छोटेलाल पांडेय अपने घर में मृत अवस्था में मिले थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जांच की। मौके से वायर के टुकड़े मिले, जबकि घर की अलमारी टूटी हुई थी।
मर्ग जांच के बाद थाना चांपा में धारा 450, 302 और 382 भा.दं.वि. के तहत अपराध दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
19 गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने अहम
पुलिस ने विवेचना पूरी कर न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 19 गवाहों के बयान कराए गए। घटनास्थल से बरामद वायर के टुकड़ों और आरोपी दीपक यादव से बरामद वायर के टुकड़ों के अभिन्न होने संबंधी साक्ष्य को अभियोजन की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया।
न्यायालय ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए माना कि मामले में प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की सभी कड़ियां एक-दूसरे से निर्णायक रूप से जुड़ी हुई हैं। इससे दोनों आरोपियों द्वारा मिलकर घर में घुसकर छोटेलाल पांडेय की हत्या करने और सोने-चांदी के आभूषण लूटने का अपराध संदेह से परे प्रमाणित हुआ।
दोनों आरोपियों को कठोर सजा
दोषी पाए गए दीपक यादव पिता एकादशिया यादव, उम्र 30 वर्ष और मिर्जा शाहिद बेग पिता स्व. मिर्जा सालिम बेग, उम्र 26 वर्ष को धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत आजीवन कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड तथा धारा 397 के तहत आजीवन कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
वहीं धारा 450 के तहत दोनों आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹10-10 हजार अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर प्रत्येक सजा के लिए 6-6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।





