छत्तीसगढ़

JANJGIR CHAMPA: PM आवास योजना में गड़बड़ी? दिव्यांग हितग्राही को नहीं मिली पहली किस्त, कलेक्टर से गुहार के बाद भी कार्रवाई शून्य

जांजगीर-चांपा। सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को पक्की छत देना है, लेकिन नवागढ़ विकासखंड के ग्राम सरखो निवासी राम सिंह चौहान के मामले ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लकवाग्रस्त और चलने-फिरने में असमर्थ राम सिंह आज भी जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं—जबकि उनके नाम से आवास स्वीकृत होने का दावा किया गया।

पहली किस्त किसी और के खाते में!

पीड़ित का आरोप है कि योजना की पहली किस्त किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। राम सिंह के अनुसार उन्हें अब तक एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ। अगर यह सही है तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है।

जर्जर घर, हर पल हादसे का डर

बरसात में मकान की दीवारें दरक चुकी हैं और ढांचा कमजोर हो गया है। दिव्यांग राम सिंह को उनकी पत्नी सहारा देकर दिनचर्या संभालती हैं। ऐसे में पक्के आवास की उम्मीद ही उनका एकमात्र सहारा थी—जो अब तक अधूरी है।

5 महीने से दफ्तरों के चक्कर

परिवार का कहना है कि वे पिछले पांच महीनों से पंचायत और जनपद कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार आश्वासन मिला, पर न राशि लौटी, न जिम्मेदारी तय हुई।

कलेक्टर से शिकायत, 15 दिन बाद भी सन्नाटा

थक-हारकर राम सिंह ने कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दी। 15 दिन बीतने के बाद भी न जांच की प्रगति सार्वजनिक हुई, न खाते में राशि आई। सवाल उठता है—क्या एक दिव्यांग हितग्राही की सुनवाई के लिए भी इतनी लंबी प्रतीक्षा जरूरी है?

जवाबदेही तय हो, तुरंत हो कार्रवाई

  1. ट्रांजैक्शन ऑडिट: किस खाते में किस आधार पर राशि गई—इसकी तत्काल जांच हो।
  2. दोषियों पर निलंबन/एफआईआर: यदि गड़बड़ी साबित हो, तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई।
  3. राशि का तत्काल भुगतान: हितग्राही के सत्यापित खाते में किस्त जारी की जाए।
  4. समयबद्ध रिपोर्ट सार्वजनिक: जांच की स्थिति 72 घंटे में सार्वजनिक की जाए।

यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो गरीब नागरिक योजनाओं पर करते हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत निर्णय लेकर दिव्यांग राम सिंह चौहान को न्याय दिलाए।

यदि प्रशासन चाहे तो एक आदेश से राहत मिल सकती है—क्या आज वह आदेश जारी होगा?

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