धर्म

JANJGIR CHAMPA: चांदी की पालकी में निकलेगी बाबा कालेश्वरनाथ की बारात, पीथमपुर में रंग पंचमी पर देशभर के नागा साधुओं का समागम

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित पीथमपुर गांव हर साल रंग पंचमी के दिन एक अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहां कालेश्वरनाथ मंदिर से भगवान शिव की भव्य बारात निकलती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। नागा साधु-संतों का समागम, शौर्य प्रदर्शन और शाही स्नान इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण होता है।

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यह ऐतिहासिक परंपरा करीब 200 साल से अधिक समय से चली आ रही है। रंग पंचमी के दिन मंदिर से पंचमुखी महादेव को डेढ़ क्विंटल चांदी की पालकी में विराजित कर पूरे गांव में भव्य बारात निकाली जाती है। नागा साधु-संत इस बारात में शामिल होकर धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

हसदेव नदी के तट पर स्थित है प्रसिद्ध मंदिर

पीथमपुर गांव जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से करीब 11 किलोमीटर और चांपा जंक्शन से लगभग 8 किलोमीटर दूर नवागढ़ ब्लॉक में हसदेव नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। यहां स्थित कालेश्वरनाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू है और यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।

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सावन महीने में यहां पूरे महीने पूजा-अर्चना और विशेष श्रृंगार होता है, जबकि महाशिवरात्रि और रंग पंचमी के दिन यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।

स्थानीय जानकारों के अनुसार, पीथमपुर में शिव बारात निकालने की परंपरा चांपा के जमींदारों ने शुरू किया था और आज भी उनके परिवार द्वारा इसका निर्वहन किया जाता है।

डेढ़ क्विंटल चांदी की पालकी बनी आकर्षण

शिव बारात में सबसे आकर्षक दृश्य भोलेनाथ की चांदी की पालकी होती है। बताया जाता है कि 1930 के दशक में राजा दादूराम शरण सिंह के समय रानी उपमा कुमारी ने बनारस से करीब डेढ़ क्विंटल चांदी की पालकी बनवाई थी। उसी पालकी में आज भी पंचधातु से बनी पंचमुखी महादेव की प्रतिमा को विराजित कर बारात निकाली जाती है।

नागा साधुओं का शौर्य प्रदर्शन और शाही स्नान

इस आयोजन में देशभर से नागा साधु-संत भी पहुंचते हैं। वे यहां शौर्य प्रदर्शन और शाही स्नान करते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यह दृश्य पूरे मेले का मुख्य आकर्षण माना जाता है।

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संतान प्राप्ति की भी है मान्यता

पीथमपुर के कालेश्वरनाथ मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी है कि यहां फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना करने से वंश वृद्धि और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। कई दंपत्ति यहां पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर अगले वर्ष भूमि पर लोटकर दर्शन करने की परंपरा निभाते हैं।

मेला और शिव बारात देखने उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालु

रंग पंचमी के दिन पीथमपुर में विशाल मेला लगता है। शिव बारात के दौरान पूरा गांव भक्ति, आस्था और उत्साह के रंग में डूब जाता है। नागा साधुओं की मौजूदगी और चांदी की पालकी में सवार पंचमुखी महादेव की झलक पाने के लिए लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

जय बाबा कालेश्वर नाथ

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