धर्म

मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान, आस्था और उमंग से भरा पर्व

सूर्य के उत्तरायण के साथ उमंग और समृद्धि का पर्व

रायपुर, 14 जनवरी 2026: मकर संक्रांति के अवसर पर आज देशभर के विभिन्न पवित्र स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना, नर्मदा और अन्य नदियों में पवित्र स्नान किया। विशेष रूप से उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिण भारत में इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक होता है, और श्रद्धालु सूर्योदय के समय नदियों में स्नान कर सूर्य देव की पूजा अर्चना करते हैं।

श्रद्धालुओं का मानना है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव का उत्तरायण होना शुभ होता है और इस दिन पवित्र जल में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगा में स्नान करने वाले विशेष रूप से इस दिन को अत्यधिक शुभ मानते हैं, क्योंकि इसे ‘माघ स्नान’ के रूप में भी जाना जाता है।

इसके साथ ही, तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान देने की परंपरा भी व्यापक रूप से निभाई जाती है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इस दिन की विशेषता अलग-अलग होती है, जैसे उत्तर भारत में ‘लोहड़ी’ का पर्व, गुजरात और महाराष्ट्र में ‘उतरायण’ और दक्षिण भारत में ‘पोंगल’ मनाया जाता है।

साधु संतों और पवित्र स्थानों पर विशेष आयोजन किए गए, जहाँ श्रद्धालुओं ने धूप, दीप और रंग-बिरंगे पतंगों से सूर्य देव की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर कई स्थानों पर भव्य मेलों का आयोजन भी हुआ, जिसमें लोगों ने पारंपरिक संगीत और नृत्य का आनंद लिया।

मकर संक्रांति का पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह सामाजिक एकता और सद्भावना को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है। इस दिन को लेकर लोग आपसी रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए एक-दूसरे को तिल और गुड़ भेंट करते हैं।

देशभर में यह पर्व उल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है, और समाज में प्रेम, भाईचारे और समृद्धि की भावना को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहा है।

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