National

महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का इस्तीफा, ढोंगी बाबा अशोक खरात विवाद के बाद बढ़ा सियासी तूफान

व्यक्तिगत कारण बताया, लेकिन राजनीतिक दबाव और वायरल वीडियो के बाद लिया गया फैसला; अशोक खरात पर कई महिलाओं से दुष्कर्म के गंभीर आरोप

मुंबई/नासिक। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे की वजह ‘व्यक्तिगत कारण’ बताई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह फैसला कथित ‘बाबा’ और ज्योतिषी अशोक खरात से जुड़े विवाद और बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में सरकार की छवि पर असर पड़ने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से भी पद छोड़ने का संकेत दिया गया था। हालांकि चाकणकर ने अपने इस्तीफे में इस विवाद का कोई जिक्र नहीं किया।

क्या है पूरा मामला?

नासिक निवासी अशोक खरात खुद को आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषी बताता था। पुलिस ने 18 मार्च को उसे गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने कई महिलाओं को निजी समस्याएं सुलझाने का झांसा देकर नशीला पदार्थ दिया और उनके साथ दुष्कर्म किया।

जांच के दौरान पुलिस को उसके घर से 58 आपत्तिजनक वीडियो मिले, जिनमें अलग-अलग महिलाएं दिखाई दे रही हैं। इसके अलावा एक पिस्तौल और कारतूस भी बरामद हुए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है।

चाकणकर पर क्यों उठे सवाल?

सोशल मीडिया पर रूपाली चाकणकर और अशोक खरात के पुराने फोटो और वीडियो वायरल हुए, जिनमें वे उनके पैर धोते और छाता पकड़ते नजर आ रही हैं। इसके बाद उनके कथित संबंधों को लेकर विवाद बढ़ गया और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।

बताया जा रहा है कि नैतिक आधार पर इस्तीफे के लिए उन पर दबाव बनाया गया। उन्होंने अपना इस्तीफा एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार को सौंपा, जिसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया है।

खुद को बताया पीड़ित

रूपाली चाकणकर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें एक महिला होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खरात दंपति को गुरु मानता था और वायरल वीडियो 5-6 साल पुराना है, जो गुरु पूर्णिमा के दौरान लिया गया था।

उन्होंने कहा, “किसी व्यक्ति का भविष्य में कैसा व्यवहार होगा, यह पहले से नहीं पता चलता। मैं खुद इस घटना से हैरान हूं।” साथ ही उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग भी की।

विपक्ष का हमला

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। आरोप है कि कार्रवाई देर से की गई और सरकार ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सभी की नजर SIT जांच और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

Related Articles

Back to top button