छत्तीसगढ़

ग्रीन एनेस्थीसिया: सिम्स बिलासपुर में इलाज के साथ पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल

सिम्स बिलासपुर में ग्रीन एनेस्थीसिया की शुरुआत, जिससे सर्जरी के दौरान पर्यावरण को होने वाले नुकसान में कमी और मरीजों के साथ डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

रायपुर, 28 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई पहल करते हुए “ग्रीन एनेस्थीसिया” की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित उपचार देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली एनेस्थीसिया गैसों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए सिम्स द्वारा आधुनिक और पर्यावरण हितैषी तकनीकों को अपनाया जा रहा है, जिससे चिकित्सा सेवाएं अधिक टिकाऊ बन सकें।

एनेस्थीसिया गैसें: पर्यावरण के लिए खतरा

सर्जरी के दौरान उपयोग की जाने वाली गैसें जैसे डेसफ्लुरेन और नाइट्रस ऑक्साइड ग्रीनहाउस गैसों की श्रेणी में आती हैं। इनका प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना अधिक होता है और ये लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती हैं।

हर वर्ष लाखों सर्जरी के कारण इन गैसों का उत्सर्जन होता है, जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

डॉक्टरों पर भी असर

एनेस्थीसिया का प्रभाव केवल मरीजों तक सीमित नहीं है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ दिनभर कई सर्जरी में शामिल रहते हैं, जिससे वे लगातार गैसों के संपर्क में आते हैं।
लंबे समय में इसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। ऐसे में ग्रीन एनेस्थीसिया उनकी सुरक्षा के लिए भी जरूरी कदम है।

क्या है ग्रीन एनेस्थीसिया?

ग्रीन एनेस्थीसिया एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मरीज को सुरक्षित बेहोशी देने के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जाता है।
इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।

सिम्स में अपनाए जा रहे प्रमुख उपाय

टीआईवीए (Total Intravenous Anesthesia)

इस तकनीक में प्रोपोफोल और मिडाज़ोलम जैसी दवाओं को सीधे नसों के माध्यम से दिया जाता है, जिससे गैसों का उपयोग कम होता है।

लो फ्लो एनेस्थीसिया

कम मात्रा में गैस देकर सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे प्रदूषण और गैस खपत दोनों घटती है।

आधुनिक उपकरणों का उपयोग

नई तकनीकों से गैस लीकेज को नियंत्रित कर ऑपरेशन थिएटर के बाहर प्रदूषण को कम किया जा रहा है।

किफायती और प्रभावी प्रणाली

यह तकनीक न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि अस्पताल के खर्च को भी कम करती है।

निष्कर्ष

ग्रीन एनेस्थीसिया सिम्स बिलासपुर की एक दूरदर्शी और सराहनीय पहल है। यह साबित करता है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
यह मॉडल आने वाले समय में अन्य अस्पतालों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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