फांसी के फंदे पर लटके मिले पति–पत्नी और मासूम बच्ची के शव

दिल दहला देने वाली घटना
दमोह / मध्य प्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर-1 में गुरुवार को एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहां एक ही घर में पति, पत्नी और उनकी 18 माह की मासूम बच्ची के शव फांसी के फंदे पर लटके मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही तेंदूखेड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों का पंचनामा कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
मुंडन संस्कार की खुशी मातम में बदली
प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पुलिस के अनुसार, मजदूरी कर जीवन यापन करने वाला मनीष केवट अपनी पत्नी दशोदा उर्फ माही और बेटी आरोही के साथ अत्यंत तंग आर्थिक हालात में रह रहा था।
गुरुवार को उनकी 18 माह की बेटी का मुंडन संस्कार होना था। परिवार बांदकपुर स्थित जागेश्वरधाम जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते यात्रा और आयोजन के लिए पैसे जुटा पाना संभव नहीं हो सका।
मदद के लिए रिश्तेदारों से लगाई गुहार, कोई आगे नहीं आया
पुलिस ने बताया कि मनीष ने मुंडन कार्यक्रम के लिए पहले ही रिश्तेदारों और परिचितों को निमंत्रण दे दिया था। पैसों की व्यवस्था के लिए उसने मदद भी मांगी, लेकिन किसी से सहायता नहीं मिल सकी। जब सारे रास्ते बंद हो गए और सामाजिक दबाव बढ़ता गया, तो परिवार मानसिक रूप से टूट गया।
पहले मासूम बच्ची, फिर माता-पिता ने किया आत्मघाती कदम
शुरुआती तफ्तीश के अनुसार, आशंका जताई जा रही है कि पहले 18 माह की मासूम आरोही को फांसी पर लटकाया गया, इसके बाद पति-पत्नी ने भी आत्महत्या कर ली। इस दृश्य ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
जांच जारी, सुसाइड नोट नहीं मिला
तेंदूखेड़ा थाना प्रभारी श्रीकांत बागरी ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। घर से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन परिस्थितियां साफ तौर पर गहरे मानसिक और आर्थिक दबाव की ओर इशारा कर रही हैं।
इलाके में शोक और सन्नाटा
घटना के बाद पूरे मोहल्ले में शोक का माहौल है। पड़ोसी और परिचित परिवार की हालत और मासूम बच्ची की मौत से स्तब्ध हैं। यह घटना एक बार फिर बताती है कि गरीबी, सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव किस तरह पूरे परिवार को तबाह कर सकते हैं।





