छत्तीसगढ़

वेदांता पॉवर प्लांट ब्लॉस्ट: 20 मजदूरों की मौत, चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कई पर केस दर्ज

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट में 20 मजदूरों की मौत। जांच में प्रबंधन की लापरवाही उजागर, FIR दर्ज, प्रशासन सख्त।

सक्ती / छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित Vedanta Limited के पावर प्लांट में हुआ भीषण बॉयलर हादसा अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया है। 14 अप्रैल की दोपहर करीब 2:33 बजे हुए इस विस्फोट ने पूरे इलाके को हिला दिया। इस दर्दनाक घटना में अब तक 20 मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है।

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इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब मृतकों में कई राज्य—उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल—से आए प्रवासी श्रमिक शामिल हैं।

FIR दर्ज, बड़े नामों पर आरोप

घटना के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एफआईआर में कंपनी के चेयरमैन Anil Agarwal, प्रबंधक देवेंद्र पटेल सहित प्लांट से जुड़े 8-10 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।

सक्ती के एसपी प्रफुल्ल ठाकुर मुताबिक, सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया और चेतावनी के बावजूद संचालन जारी रखा गया।

जांच में सामने आईं चौंकाने वाली बातें

औद्योगिक सुरक्षा विभाग और फॉरेंसिक जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार बॉयलर के अंदर अत्यधिक फ्यूल जमा हो गया था. अचानक दबाव तेजी से बढ़ा और सिस्टम उसे संभाल नहीं पाया, उत्पादन बढ़ाने के लिए लोड को तेजी से बढ़ाया गया. नियमित मेंटेनेंस में लापरवाही बरती गई। तकनीकी खराबियों के बावजूद प्लांट चालू रखा गया। इन सभी कारणों ने मिलकर इस हादसे को और भयावह बना दिया।

1-2 सेकेंड में हुआ विस्फोट

बताया जा रहा है कि बॉयलर में प्रेशर इतनी तेजी से बढ़ा कि कर्मचारियों को रिएक्ट करने का मौका तक नहीं मिला। 2028 TPH क्षमता वाले वाटर ट्यूब बॉयलर में अचानक विस्फोट हुआ, जिससे अंदर और बाहर की पाइपलाइन भी बुरी तरह प्रभावित हुई।

मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच में हादसे के तकनीकी और मानवीय कारण, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान, ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों का विवरण, पहले की सुरक्षा जांच रिपोर्ट, भविष्य में सुरक्षा सुधार के उपाय। प्रशासन ने 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

नेताओं का दौरा और सियासी बयानबाज़ी

हादसे के बाद राज्य के उद्योग मंत्री Lakhan Lal Devangan ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और इलाज की समीक्षा की। वहीं विपक्ष के नेता Charandas Mahant और कांग्रेस नेता Deepak Baij ने भी पीड़ितों से मिलकर सरकार और कंपनी प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए।

सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की कई परतों में मौजूद खामियों को उजागर करता है। उत्पादन बढ़ाने की होड़, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और समय रहते कार्रवाई न होना—ये सभी कारण अब जांच के दायरे में हैं।

फिलहाल, इस हादसे ने 20 परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि इस त्रासदी के लिए असली जिम्मेदार कौन है—प्रबंधन, तकनीकी टीम या निगरानी तंत्र।

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