छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल: सूरजपुर घटना ने ‘नक्सल मुक्त’ दावे की खोली पोल
भास्कर पारा कोयला खदान में रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों से मारपीट, बंधक बनाकर वीडियो डिलीट कराने का आरोप

रायपुर, 24 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में एक ओर सरकार प्रदेश को नक्सल मुक्त बताकर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं दूसरी ओर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूरजपुर जिले में हुई ताजा घटना ने इन दावों की हकीकत उजागर कर दी है।
छत्तीसगढ़ सक्रिय पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज गोस्वामी ने इस घटना को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर बढ़ते हमले न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश भी है।
क्या है पूरा मामला?
19 अप्रैल 2026 को पत्रकार चंद्र प्रकाश साहू, लोकेश गोस्वामी और मनीष जायसवाल सूरजपुर जिले के भास्कर पारा स्थित कोयला खदान क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रहे थे। आरोप है कि इस दौरान वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया।
पत्रकारों का आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई. कैमरे और मोबाइल छीन लिए गए. रिकॉर्ड किए गए वीडियो जबरन डिलीट कराए गए. करीब 3 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया. गाली-गलौज और धमकियां दी गईं।
यह पूरा मामला गंभीर कानून-व्यवस्था और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
“क्या पत्रकार अब सुरक्षित नहीं?”
राज गोस्वामी ने सवाल उठाया कि घटना के चार दिन बाद भी पुलिस की कार्रवाई धीमी क्यों है। उन्होंने कहा कि यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं प्रशासन प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रहा है।
उनके अनुसार,
“जब पत्रकारों को ही डराया-धमकाया जाएगा, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा?”
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
उन्होंने बस्तर के युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामले अभी लोगों की यादों से मिटे भी नहीं हैं और लगातार नई घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे पत्रकारों में डर का माहौल बन रहा है।
प्रशासन से क्या मांग?
पत्रकार संघ ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि:
- तुरंत एफआईआर दर्ज हो
- सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो
- निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो
- पीड़ित पत्रकारों को सुरक्षा दी जाए
लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी
राज गोस्वामी ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि प्रदेश में सच लिखना और दिखाना अपराध बन गया है।
उन्होंने कहा कि आंचलिक पत्रकार ही पत्रकारिता की मजबूत नींव हैं, और उन्हें कमजोर करना लोकतंत्र को कमजोर करने जैसा है।





