
जांजगीर-चांपा / जिले में कानून-व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जांजगीर-चांपा पुलिस ने थाना सारागांव क्षेत्र के आदतन गुंडा बदमाश अशोक जायसवाल निवासी चोरिया के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे 01 वर्ष के लिए जिला बदर कर दिया है।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 एवं 5 के तहत की गई है। जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर जांजगीर-चांपा द्वारा आदेश पारित किए जाने के बाद आरोपी को तत्काल प्रभाव से जिले और आसपास के सीमावर्ती जिलों से निष्कासित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
थाना सारागांव क्षेत्र में रहने वाला अशोक जायसवाल लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके विरुद्ध अलग-अलग धाराओं में कुल 08 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं. 06 प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के मामले दर्ज हैं. मारपीट, गाली-गलौच, जान से मारने की धमकी, लड़ाई-झगड़ा, हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध पंजीबद्ध हैं।
पुलिस का कहना है कि कई बार समझाइश और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बावजूद आरोपी के व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ।
किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 एवं 5 के अंतर्गत की गई है।
इस अधिनियम के तहत यदि कोई व्यक्ति लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहता है और उससे क्षेत्र की शांति एवं कानून व्यवस्था को खतरा होता है, तो जिला प्रशासन उसे निर्धारित अवधि के लिए जिले और आसपास के क्षेत्रों से निष्कासित (जिला बदर) कर सकता है।
किन-किन जिलों से किया गया निष्कासन?
आदेश के अनुसार आरोपी को जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा और बलौदा बाजार क्षेत्रों से 01 वर्ष के लिए जिला बदर किया गया है।
इस आदेश के तहत आरोपी इन जिलों की सीमाओं में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक ने भेजा था प्रतिवेदन
जानकारी के अनुसार, आरोपी की बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा ने विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर जिला दण्डाधिकारी को भेजा था।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि आरोपी की दुस्साहसी एवं आक्रामक प्रवृत्ति के कारण आम नागरिक उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने से भी कतराते हैं। क्षेत्र में शांति भंग होने और गंभीर संज्ञेय अपराध की आशंका लगातार बनी हुई थी।
कलेक्टर ने पारित किया आदेश
जिला प्रशासन ने सभी तथ्यों और आपराधिक रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद एक वर्ष के लिए जिला बदर का आदेश पारित किया।
इस आदेश का उद्देश्य है क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना।आम नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना। आपराधिक तत्वों पर अंकुश लगाना। प्रशासन का मानना है कि यह कार्रवाई जिले में अपराध नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
क्यों जरूरी होती है जिला बदर की कार्रवाई?
जिला बदर की कार्रवाई तब की जाती है जब आरोपी लगातार अपराध करता हो, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का असर न हो, गवाह डर के कारण सामने न आ रहे हों, क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया हो ऐसे मामलों में आरोपी को अस्थायी रूप से क्षेत्र से बाहर करना ही एक प्रभावी उपाय माना जाता है।
जिले में अपराध नियंत्रण की रणनीति
जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इन दिनों अपराध नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हाल के दिनों में आदतन अपराधियों की सूची तैयार की गई है। निगरानी बढ़ाई गई है, प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई तेज की गई है। थाना स्तर पर संवेदनशील क्षेत्रों की मॉनिटरिंग की जा रही है। इस कार्रवाई को भी उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
आम जनता के लिए पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत थाना या डायल नंबर पर सूचित करें।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश है — अपराध और असामाजिक तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।





