मणिकांता एल ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में जीते 8 स्वर्ण और 1 रजत, अब एशियाई खेलों की ओर नजर
बैकस्ट्रोक विशेषज्ञ मणिकांता ने 4 स्ट्रोक्स में शानदार प्रदर्शन कर टीम के लिए अधिकतम पदक जीते

रायपुर, 29 मार्च 2026: कर्नाटक के 21 वर्षीय तैराक मणिकांता एल ने पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में आठ स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपनी धाक बनाई। दावणगेरे के रहने वाले मणिकांता बेंगलुरु के बसवनगुड़ी एक्वाटिक सेंटर में कोच राजीव आरएस के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेते हैं।

मणिकांता ने चारों स्ट्रोक्स—बैकस्ट्रोक, फ्रीस्टाइल, बटरफ्लाई और ब्रैस्टस्ट्रोक—में हिस्सा लेकर अपनी टीम के लिए अधिकतम पदक सुनिश्चित किए। उनके लिए चुनौती केवल रेस जीतना नहीं थी, बल्कि कम समय में हर रेस के बीच शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहना भी था।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण में सबसे सफल खिलाड़ी मणिकांता ने कहा,
“अलग-अलग स्ट्रोक्स के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं होता, क्योंकि हर रेस की रणनीति अलग होती है। ऊपर से रेस के बीच समय भी बहुत कम था, जो इसे और चुनौतीपूर्ण बना रहा था।”
तीसरे दिन की अंतिम रेस 50 मीटर फ्रीस्टाइल में उन्हें अपने ही राज्य के धुनीश एम से पीछे रहते हुए रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मणिकांता ने बताया कि उस समय उनके पेट की मांसपेशियों में जकड़न होने लगी थी, जिससे गति प्रभावित हुई।
मणिकांता को तैराकी की प्रेरणा उनके चाचा मंजूनाथ से मिली, जो स्वयं राष्ट्रीय स्तर के तैराक रह चुके हैं। पहले बटरफ्लाई में ध्यान देने वाले मणिकांता ने 2019 में कंधे की चोट के बाद बैकस्ट्रोक पर फोकस किया।
उन्होंने कहा,
“मुझे लगता है कि मैं बैकस्ट्रोक के लिए ही बना हूं। अब मैं पूरी तरह बैकस्ट्रोक पर ध्यान देना चाहता हूं और इस साल होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना चाहता हूं।”
मणिकांता के पास पहले भी खेलो इंडिया में 20 से अधिक पदक और सीनियर नेशनल्स में दो रजत व एक कांस्य पदक हैं। एशियाई खेलों के लिए 200 मीटर बैकस्ट्रोक में क्वालीफिकेशन समय 2:13.03 सेकंड है, जबकि उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 2:20.55 सेकंड है। मणिकांता ने पिछले दो महीनों से इसी लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत की है।
उनका लंबी अवधि का सपना अपनी तैराकी उपलब्धियों के आधार पर कर्नाटक पुलिस में नौकरी हासिल करना भी है।




