Har Ghar Soak Pit Abhiyan: जांजगीर-चांपा में 1 मार्च से जल संरक्षण महाभियान शुरू, भूजल बचाने जनभागीदारी का आह्वान

जांजगीर-चांपा। गर्मी की दस्तक से पहले छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में जल संकट से निपटने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया है। 1 मार्च 2026 से जिले में “हर घर सोक पिट” आधारित विशेष जल संरक्षण महाभियान की शुरुआत कर दी गई है। इस अभियान का उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल स्तर को सुधारना और जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देना है।
जिले के कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल रावटे के मार्गदर्शन में यह महाभियान पूरे जिले में चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है।
“मोर गांव – मोर पानी” संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा अभियान
कलेक्टर महोबे ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि “मोर गांव – मोर पानी” के संकल्प को साकार करना हम सबकी जिम्मेदारी है। हर घर तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी ग्राम पंचायतों में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं और अधिक से अधिक परिवारों को “हर घर सोक पिट” निर्माण से जोड़ा जाए, ताकि यह अभियान स्थायी जन-आंदोलन बन सके।
क्या है “हर घर सोक पिट” योजना?
“हर घर सोक पिट” का मतलब है प्रत्येक घर में वर्षा जल को जमीन में समाहित करने के लिए एक संरचना का निर्माण। इससे—
- वर्षा का पानी व्यर्थ बहने से बचेगा
- भूजल स्तर में सुधार होगा
- हैंडपंप और कुओं में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी
- जलभराव की समस्या कम होगी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हर घर में सोक पिट बनाया जाए तो जिले के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
गांव-गांव में बैठकें, जनजागरूकता पर फोकस
जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल रावटे ने बताया कि जिले की सभी जनपद पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे ग्राम स्तर पर बैठकें आयोजित करें और लोगों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराएं।
अभियान के तहत— ग्राम सभाओं में जल संरक्षण पर चर्चा, स्व-सहायता समूहों की भागीदारी, युवाओं और स्कूलों की सहभागिता, तकनीकी मार्गदर्शन के साथ सोक पिट निर्माण।
जनभागीदारी के बिना यह अभियान सफल नहीं हो सकता, इसलिए प्रशासन हर वर्ग को इससे जोड़ने पर जोर दे रहा है।
क्यों जरूरी है जल संरक्षण महाभियान?
जांजगीर-चांपा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में हर साल गर्मी के मौसम में जल स्तर गिरने की समस्या सामने आती है। समय रहते यदि वर्षा जल का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सामुदायिक प्रयासों से ही जल संकट का स्थायी समाधान संभव है। “हर घर सोक पिट” जैसे छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।
जनभागीदारी से बनेगा जन-आंदोलन
कलेक्टर महोबे ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक नागरिक इस दिशा में एक कदम बढ़ाए, तो पूरा जिला जल आत्मनिर्भर बन सकता है।
प्रशासन की अपील है कि— हर घर में सोक पिट बनवाएं, वर्षा जल को संरक्षित करें, पड़ोसियों को भी प्रेरित करें, ग्राम सभाओं में सक्रिय भाग लें।
यह अभियान केवल प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यदि हर नागरिक जुड़ता है, तो “हर घर जल संचय” का सपना जल्द ही हकीकत बन सकता है।





