Chhattisgarh: हथियार छोड़ हुनर की राह पर लौटे युवा, इलेक्ट्रीशियन प्रशिक्षण से बदल रही जिंदगी
पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित युवाओं को मिल रहा कौशल विकास का अवसर, स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे कदम

रायपुर, 16 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। कभी हिंसा के रास्ते पर भटके युवा अब मुख्यधारा में लौटकर अपने भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। “अब हथियार नहीं, हुनर” की सोच के साथ ये युवा कौशल विकास प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हैं।

जिले के पुनर्वास केंद्र में रह रहे ग्राम कुधुर के तुलसी राम कश्यप, रजमन और गोबरू वर्तमान में लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण के तहत उन्हें वायरिंग का दो माह का कोर्स कराया जा रहा है, जिसमें अब तक लगभग 15 दिनों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
तुलसी राम कश्यप बताते हैं कि पहले क्षेत्र में भय और असुरक्षा के माहौल के कारण वे गलत रास्ते पर चले गए थे, लेकिन राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण कर नई शुरुआत करने का निर्णय लिया। अब वे न सिर्फ सुरक्षित वातावरण में प्रशिक्षण ले रहे हैं, बल्कि भविष्य में अपने गांव में स्वरोजगार शुरू करने की योजना भी बना रहे हैं।
इसी तरह रजमन और गोबरू ने भी पुनर्वास नीति का लाभ लेते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। दोनों युवाओं का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपने गांव में इलेक्ट्रिकल कार्य शुरू कर आय अर्जित करेंगे और अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकेंगे।
तीनों युवाओं ने राज्य शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें नया जीवन शुरू करने का मौका मिला है। जहां पहले अस्थिरता और भय का माहौल था, वहीं अब वे आत्मविश्वास और सुरक्षा के साथ अपने भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को कौशल विकास, रोजगार और आजीविका के बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन द्वारा संचालित पुनर्वास केंद्र इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है, जहां भटके हुए युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में फिर से स्थापित किया जा रहा है।





