
बिलासपुर, 06 मई 2026। अपराध जांच को और अधिक वैज्ञानिक एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज पुलिस द्वारा DNA एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन और परीक्षण विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 5 मई 2026 को पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।

कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से करीब 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल एवं उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा की उपस्थिति रही।
अपराध जांच में DNA साक्ष्य की अहम भूमिका
कार्यक्रम की शुरुआत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने बताया कि हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में DNA साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार साक्ष्य संकलन में छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक गलतियों के कारण रिपोर्ट निष्क्रिय हो जाती है, जिससे आरोपियों को लाभ मिल जाता है।
उन्होंने कहा कि DNA को आधुनिक न्याय प्रणाली का “गोल्ड स्टैंडर्ड” माना जाता है, जो न केवल दोषियों को सजा दिलाने में मदद करता है बल्कि निर्दोषों को भी न्याय दिलाता है।
विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी
कार्यशाला में क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला बिलासपुर की वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रियंका लकड़ा और डॉ. स्वाति कुजूर ने विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया।
मुख्य बिंदु:
- DNA से व्यक्ति की सटीक पहचान संभव
- रक्त, लार, बाल, हड्डी जैसे जैविक साक्ष्यों का विश्लेषण
- पितृत्व विवाद और अज्ञात शवों की पहचान में उपयोग
- फोरेंसिक बायोलॉजी के तहत नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण
- मानव और पशु साक्ष्य की पहचान (Species Identification)
साक्ष्य संकलन में सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि DNA साक्ष्य अत्यंत संवेदनशील होते हैं। नमी, तापमान और बैक्टीरिया से ये नष्ट हो सकते हैं। इसलिए:
- साक्ष्यों को प्लास्टिक की बजाय कागज के बैग में रखें
- नमूनों को सूखा रखें
- Chain of Custody का पालन अनिवार्य रूप से करें
प्रश्नोत्तर सत्र में समाधान
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली समस्याएं साझा कीं। वैज्ञानिकों ने इनका व्यावहारिक समाधान बताया।
सम्मान एवं निष्कर्ष
कार्यक्रम के अंत में आईजी द्वारा दोनों वैज्ञानिक अधिकारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से अपराध जांच में DNA साक्ष्य के उपयोग में सुधार होगा।





