PM आवास योजना में गंभीर गड़बड़ी का आरोप: दिव्यांग हितग्राही को नहीं मिली किस्त, 2 महीने से जांच अधर में—प्रशासन पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। गरीबों को पक्की छत देने का वादा करने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना अब सवालों के घेरे में है। नवागढ़ विकासखंड के ग्राम सरखो निवासी दिव्यांग राम सिंह चौहान आज भी जर्जर कच्चे मकान में जिंदगी काटने को मजबूर हैं, जबकि कागजों में उनके नाम पर आवास स्वीकृत बताया जा रहा है।
कागजों में घर, जमीन पर बदहाली
पीड़ित परिवार का आरोप है कि योजना की पहली किस्त उनके खाते में आने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि अब तक न तो यह राशि वापस आई और न ही हितग्राही को एक भी किस्त मिली।
नोटिस जारी, लेकिन कार्रवाई गायब
जनपद पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि जिस व्यक्ति के खाते में राशि गई, उसे कानूनी नोटिस भेजा गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नोटिस कागजों में ही सिमटकर रह गया है—न वसूली, न कार्रवाई, न जवाबदेही।
दिव्यांग का घर बना हादसे का इंतजार
लकवाग्रस्त राम सिंह चौहान टूटते-फूटते कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं। दीवारें दरक चुकी हैं, छत कभी भी गिर सकती है। भीषण गर्मी और आने वाले बारिश के मौसम ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है।
5 महीने से चक्कर, सिर्फ आश्वासन
परिवार पिछले पांच महीनों से पंचायत और जनपद कार्यालय के चक्कर काट रहा है। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन न राशि मिली और न ही किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई।
कलेक्टर को शिकायत, फिर भी सन्नाटा
पीड़ित ने कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही कोई राहत मिली।
CEO तक पहुंचने की कोशिश भी नाकाम
इस मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) गोकुल रावटे से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही बाद में कोई प्रतिक्रिया दी। इससे प्रशासनिक जवाबदेही पर और बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो महीने बाद भी न जांच, न न्याय
यह मामला 18 फरवरी 2026 को सामने आया था। लेकिन 20 अप्रैल 2026 तक भी न तो जांच पूरी हुई और न ही दिव्यांग हितग्राही को कोई राहत मिली है।
अब सीधे सवाल
- क्या PM आवास योजना में खुलेआम गड़बड़ी हो रही है?
- गलत खाते में गई सरकारी राशि की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- नोटिस के बाद भी वसूली क्यों नहीं हुई?
- क्या दिव्यांग की पीड़ा भी सिस्टम को नहीं झकझोर पा रही?
- और सबसे बड़ा सवाल—क्या जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से भी बचेंगे?
मांग: अब नहीं, अभी कार्रवाई
- ट्रांजैक्शन की तत्काल जांच
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई
- गलत खाते से राशि की वसूली
- हितग्राही को तुरंत भुगतान
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक
यह मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सीधे तौर पर गरीब और दिव्यांग हितग्राहियों के भरोसे के साथ खिलवाड़ होगा।





