छत्तीसगढ़

सायरा बानो बनी आत्मनिर्भर की मिसाल: दिव्यांग महिला ई-रिक्शा चलाकर कमा रही सम्मानजनक आजीविका

धमतरी / छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की सायरा बानो ने साबित कर दिया है कि अगर मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान हो तो कोई भी बाधा सफलता की राह में रोक नहीं बन सकती। शारीरिक दिव्यांगता और अत्यंत गरीब पारिवारिक स्थिति के बावजूद सायरा बानो आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।

कल, 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह कहानी और भी प्रेरणादायक बन जाती है।

सायरा बानो पहले आर्थिक तंगी में जीवन यापन कर रही थीं। रोजगार के अभाव के कारण दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना भी उनके लिए चुनौती बन गया था। ऐसे समय में उन्होंने हार नहीं मानी और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की अपील की।

उनकी परिस्थितियों और आत्मनिर्भर बनने के जज़्बे को देखते हुए कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने उनकी मदद की। उन्होंने सायरा बानो को बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की। प्रशिक्षण में सायरा बानो ने पूरी लगन और मेहनत से ई-रिक्शा चलाने की तकनीक सीख ली। साथ ही उन्हें स्वरोज़गार और यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद समाज कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के अंतर्गत सायरा बानो को ई-रिक्शा प्रदान किया गया।

आज सायरा बानो धमतरी शहर में ई-रिक्शा चलाकर आत्मविश्वास के साथ अपनी आजीविका कमा रही हैं। उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये की आय हो रही है, जिससे वे अपने जीवन की आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं।

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा, “शासन की योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाना है। यदि लाभार्थी दृढ़ संकल्प और मेहनत से आगे बढ़ें, तो वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।”

सायरा बानो की यह सफलता की कहानी न केवल दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए संदेश है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने का साहस और संकल्प हो।

Related Articles

Back to top button