विश्व गौरैया दिवस 2026: गांव से शहर तक गायब होती गौरैया पर चिंता, विशेषज्ञों ने दिए संरक्षण के सुझाव
शहरीकरण और प्रदूषण से घट रही गौरैया की संख्या, जागरूकता बढ़ाने पर दिया गया जोर

रायपुर, 22 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के मार्गदर्शन में विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर 20 मार्च को एक ऑनलाइन वेबीनार का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पर्यावरणविदों, विषय विशेषज्ञों, पक्षी प्रेमियों, पैराटैक्सोनॉमिस्ट, महाविद्यालयों के प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वेबीनार के संयोजक सदस्य सचिव मातेश्वरन व्ही. ने अपने उद्बोधन में गौरैया की लगातार घटती संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलते पर्यावरण के कारण गौरैया का अस्तित्व खतरे में है। ऐसे में इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने और बोर्ड के साथ जुड़कर काम करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. हितनारायण टंडन, सहायक प्राध्यापक, संत गुरु घासीदास शासकीय पीजी महाविद्यालय, कुरूद ने अपने प्रस्तुतीकरण में गौरैया की घटती संख्या के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन, कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, कंक्रीट के जंगल और पारंपरिक घरों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। साथ ही उन्होंने गौरैया संरक्षण के लिए घरों में घोंसले बनाने, दाना-पानी की व्यवस्था करने और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय सुझाए।
दूसरे वक्ता के रूप में eBird (छत्तीसगढ़) के रिव्यूअर जागेश्वर वर्मा ने गौरैया के लिए अनुकूल आवास विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में छोटे-छोटे प्रयास जैसे बालकनी में पानी और दाना रखना, कृत्रिम घोंसले लगाना और पेड़-पौधों को बढ़ावा देना गौरैया की संख्या बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
वेबीनार के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से कई सवाल पूछे, जिनका संतोषजनक समाधान दिया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जैव विविधता संरक्षण से जुड़ी सरकारी पहल को मजबूत करना रहा।
गौरतलब है कि विश्व गौरैया दिवस हर वर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शहरीकरण और प्रदूषण के कारण तेजी से घट रही गौरैया (Passer domesticus) के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह दिन इस नन्हीं चिड़िया के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करता है और लोगों को उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।





