छत्तीसगढ़

करही गोलीकांड में 15 दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ: हाईटेक सिस्टम के दावों पर उठे सवाल, अपराधी अब भी गिरफ्त से बाहर

पीड़ित परिवार ने आईजी से लगाई गुहार

जांजगीर-चांपा / छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के करही गांव में हुए चर्चित गोलीकांड और 19 वर्षीय आयुष कश्यप की हत्या को 15 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक पुलिस किसी भी मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंच पाई है। जिस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया था, वह अब जांच की धीमी रफ्तार और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।

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हाईटेक पुलिसिंग के दावों पर सवाल

बिलासपुर रेंज आईजी रामगोपाल गर्ग ने पदभार संभालते समय स्मार्ट पुलिसिंग, टेक्नोलॉजी आधारित जांच और तेज कार्रवाई के बड़े दावे किए थे। “त्रिनयन” और “सशक्त” जैसे ऐप्स के जरिए अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी को आसान बनाने की बात कही गई थी। लेकिन करही गोलीकांड के बाद ये दावे जमीन पर कमजोर नजर आ रहे हैं।

घटना के बाद 35 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम जांच में लगी हुई है। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बावजूद अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।

परिवार न्याय के लिए भटकता रहा

मृतक आयुष कश्यप का परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। परिजन थाना, पुलिस अधिकारियों, विधायक, सांसद और यहां तक कि आईजी कार्यालय तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी है।

परिवार ने बिलासपुर में आईजी से भी मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। वहीं जांजगीर में कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप और भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई।

अवैध रेत कारोबार पर उठे सवाल

मृतक के पिता सम्मेलाल कश्यप का आरोप है कि यह हत्या अवैध रेत खनन से जुड़े विवाद का परिणाम हो सकती है। उनका कहना है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम पुलिस को बताए गए हैं, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

इस कारण इलाके में यह चर्चा तेज है कि जांच किस दिशा में जा रही है और आरोपी अब तक पकड़ से बाहर क्यों हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक होने के बावजूद आरोपी अब तक फरार हैं, यह गंभीर स्थिति है। वहीं भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े ने भी प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने की बात कही है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

आयुष की हत्या के बाद परिवार गहरे सदमे में है। घायल भाई अब भी उस भयावह घटना से उबर नहीं पाया है। परिवार को सिर्फ बेटे को खोने का दर्द ही नहीं, बल्कि इस बात की चिंता भी सता रही है कि कहीं यह मामला भी लंबी जांच में उलझकर न रह जाए।

सिस्टम पर बड़ा सवाल

करही गोलीकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि जब पुलिस के पास आधुनिक तकनीक, संसाधन और बड़ी टीम मौजूद है, तो फिर 15 दिन बाद भी आरोपी क्यों पकड़ से बाहर हैं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यही घटना किसी प्रभावशाली परिवार के साथ हुई होती, तो क्या जांच की रफ्तार ऐसी ही रहती?

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