7 दिन वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ती रही नवजात, डॉक्टरों की मेहनत से मिला नया जीवन

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में 7 दिन तक वेंटिलेटर पर रही गंभीर नवजात बच्ची को डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत से नया जीवन मिला। एक महीने के सफल इलाज के बाद बच्ची स्वस्थ होकर घर लौटी।
दंतेवाड़ा/रायपुर, 19 जून 2026। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में चिकित्सकों की तत्परता, विशेषज्ञता और समर्पण से एक गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्ची को नया जीवन मिला है। जीवन और मृत्यु के बीच सात दिनों तक वेंटिलेटर पर संघर्ष कर रही इस मासूम ने आखिरकार डॉक्टरों की अथक मेहनत के दम पर मौत को मात दे दी।
जानकारी के अनुसार, गीदम विकासखंड के पदमेटा स्कूलपारा निवासी मंजू अलामी ने 10 मई 2026 को एक बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के तुरंत बाद नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी, शरीर में शुगर का स्तर लगातार गिर रहा था और बार-बार झटके भी आ रहे थे। बच्ची की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर करना भी जोखिम भरा माना जा रहा था।
ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों ने बिना समय गंवाए नवजात को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भर्ती किया। डॉक्टरों ने उपलब्ध संसाधनों और अपनी चिकित्सकीय दक्षता के आधार पर इलाज शुरू किया। बच्ची को लगातार सात दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, जहां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने 24 घंटे निगरानी करते हुए उसका उपचार किया।
लगातार प्रयासों और बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि सात दिनों बाद नवजात की स्थिति में सुधार दिखाई देने लगा। इसके बाद उसे वेंटिलेटर से हटाया गया और विशेष निगरानी में रखा गया। लगभग एक महीने तक चले उपचार के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई और 13 जून 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके ने बताया कि गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर सफलतापूर्वक स्वस्थ करना जिला चिकित्सालय के नवजात चिकित्सा विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के लगातार बेहतर होते स्तर को भी दर्शाती है।
यह घटना साबित करती है कि समर्पित चिकित्सक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलकर असंभव लगने वाली परिस्थितियों में भी नई उम्मीद जगा सकती हैं।





