म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश, बैंक कर्मचारी सहित 5 आरोपी गिरफ्तार

जांजगीर-चांपा साइबर थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बैंक कर्मचारी सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में कर्नाटक और महाराष्ट्र के साइबर ठगी मामलों में ₹1.62 लाख के ऑनलाइन लेनदेन का खुलासा हुआ।
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में साइबर थाना पुलिस ने देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाले म्यूल अकाउंट गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बैंक कर्मचारी सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में कर्नाटक और महाराष्ट्र के तीन साइबर ठगी मामलों में करीब 1.62 लाख रुपये के ऑनलाइन लेनदेन का खुलासा हुआ है।
पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे। इन्हीं खातों का उपयोग विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी हरिशंकर श्रीवास ने बताया कि अनिल नामदेव उर्फ चेतन और राजेश सोनी उर्फ रिंकु सोनी ने उसे कमीशन का लालच देकर बैंक खाता खुलवाया था। जांच में यह भी सामने आया कि संदीप सिंह ठाकुर और कमल विरानी ने भी अपने तथा अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों तक पहुंचाए।
पुलिस के अनुसार इन खातों के माध्यम से साइबर अपराधी देश के अलग-अलग राज्यों में ठगी की रकम का लेनदेन करते थे, जिससे उनकी पहचान छिपी रहती थी।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे कोई व्यक्ति लालच या कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए उपलब्ध करा देता है। ऐसे खातों के जरिए ठगी की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जाती है ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। कानून के अनुसार ऐसा खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी अपराध में सहभागी माना जाता है।
पुलिस की अपील
साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। ऐसा करना दंडनीय अपराध है और दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो वह तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।





