उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी भारतीय विशाल उड़न गिलहरी, कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ वीडियो

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि
रायपुर, 21 जून 2026। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। रिजर्व क्षेत्र में दुर्लभ भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (Indian Giant Flying Squirrel) की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस दुर्लभ वन्यजीव का वीडियो भी कैमरे में कैद हुआ है, जिससे वन अधिकारियों, वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह का माहौल है।

भारतीय विशाल उड़न गिलहरी अपनी अनोखी उड़ान क्षमता और निशाचर जीवनशैली के लिए जानी जाती है। यह प्रजाति पेड़ों के बीच फैली विशेष त्वचा झिल्ली की सहायता से लंबी दूरी तक ग्लाइड कर सकती है। सामान्य रूप से यह घने और सुरक्षित जंगलों में निवास करती है, इसलिए इसकी उपस्थिति किसी भी वन क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय विशाल उड़न गिलहरी मुख्य रूप से रात्रिचर प्राणी है। यह दिन के समय पेड़ों की खोखलों और घने पत्तों के बीच विश्राम करती है, जिसके कारण इसे देख पाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। ऐसे में इसका वीडियो रिकॉर्ड होना वन्यजीव अध्ययन और संरक्षण की दृष्टि से भी बड़ी उपलब्धि है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इस दुर्लभ प्रजाति का दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन क्षेत्र विभिन्न वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास प्रदान कर रहा है। वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दुर्लभ जीवों की उपस्थिति के रूप में सामने आने लगा है।
उल्लेखनीय है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहले से ही बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ता, अनेक पक्षी प्रजातियों और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए जाना जाता है। अब भारतीय विशाल उड़न गिलहरी की मौजूदगी ने इस संरक्षित क्षेत्र की जैव विविधता को और अधिक समृद्ध बना दिया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरणीय जागरूकता और प्रकृति पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में भारतीय विशाल उड़न गिलहरी का दिखाई देना छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों का प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।





