रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे, 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन; 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री

रायपुर, 02 जून 2026। छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद से होने वाली दृष्टिहीनता को खत्म करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार सफल साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य ने वर्ष 2025-26 में 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है।
स्वास्थ्य विभाग ने शासकीय अस्पतालों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर नेत्र चिकित्सा सेवाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी निःशुल्क उपचार और ऑपरेशन की सुविधा मिल रही है।
राज्य में हुए कुल मोतियाबिंद ऑपरेशन में सरकारी एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी अस्पतालों ने 49 प्रतिशत योगदान दिया। विशेषज्ञों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों को मजबूत बना रहा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित हुई नेत्र चिकित्सा सेवाओं के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में बढ़ोतरी हुई थी। अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर घर-घर सर्वे के माध्यम से मरीजों की पहचान की जा रही है और उनका समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत चल रहे इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश के 15 जिले अब तक “कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री” का दर्जा हासिल कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेजी से जारी है।
रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य कर रहा है। यहां दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं बड़े शहरों में संचालित बेस अस्पतालों के माध्यम से सुरक्षित और प्रोटोकॉल आधारित मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की इस व्यवस्था से हजारों लोगों की आंखों की रोशनी लौट रही है। छत्तीसगढ़ नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है।





