छत्तीसगढ़

हिंद मल्टी सर्विसेज परियोजना पर उठे सवाल, दीपक दुबे ने मांगी स्वतंत्र जांच और स्वीकृति स्थगित करने की मांग

जांजगीर-चांपा। भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष दीपक दुबे ने ग्राम बिरगहनी, तहसील बलौदा स्थित हिंद मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित कोयला धुलाई संयंत्र विस्तार परियोजना और 25 मेगावाट एएफबीसी ताप विद्युत संयंत्र को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय नियामक संस्थाओं, पर्यावरणीय प्राधिकरणों और जनसुनवाई अधिकारी को विस्तृत आपत्ति पत्र सौंपने का दावा किया है।

दीपक दुबे के अनुसार परियोजना की क्षमता 0.96 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 2.40 मिलियन टन प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि परियोजना के पर्यावरणीय अनुपालन, जल उपयोग, भूजल दोहन, कोयला अपशिष्ट प्रबंधन, जनस्वास्थ्य प्रभाव, श्रमिक सुरक्षा और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

उन्होंने मांग की है कि परियोजना के स्थापना काल से अब तक के उत्पादन, कोयला परिवहन, राजस्व अभिलेख, जीएसटी रिकॉर्ड, रॉयल्टी दस्तावेज, भूजल उपयोग और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए। साथ ही परियोजना क्षेत्र एवं प्रभाव क्षेत्र में जल संसाधनों की स्थिति, भूजल स्तर, जल उपलब्धता और स्थानीय नागरिकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई है।

दीपक दुबे ने कहा कि परियोजना के 10 किलोमीटर अध्ययन क्षेत्र में शामिल 53 गांवों में पर्यावरणीय प्रभाव, सामाजिक प्रभाव, जनस्वास्थ्य और आजीविका संबंधी अध्ययन कराया जाना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र की वहन क्षमता, संचयी पर्यावरणीय प्रभाव तथा समूहगत प्रभावों का मूल्यांकन भी स्वतंत्र एजेंसियों से कराने की मांग की।

उन्होंने यह भी मांग की कि परियोजना से संबंधित उत्सर्जन निगरानी, वायु गुणवत्ता, भूजल और सतही जल निगरानी के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए तथा उनका तृतीय पक्ष सत्यापन कराया जाए। इसके अलावा पर्यावरणीय स्वीकृतियों की शर्तों के पालन का संयुक्त स्थल निरीक्षण करने की भी मांग की गई है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रस्तावित 25 मेगावाट एएफबीसी ताप विद्युत संयंत्र से उत्पन्न होने वाली फ्लाई ऐश के प्रबंधन, उपयोग और निस्तारण व्यवस्था की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। साथ ही क्षेत्र के गांवों में स्वास्थ्य सर्वेक्षण और श्रमिकों से जुड़े श्रम कानूनों के पालन की जांच कराने की बात कही गई है।

दीपक दुबे ने कहा कि जब तक सभी जांच, अध्ययन और सत्यापन पूरे नहीं हो जाते तथा उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक परीक्षण के लिए उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक परियोजना से संबंधित पर्यावरणीय, जल एवं विस्तार स्वीकृतियों को स्थगित रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि उठाए गए मुद्दों पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है, तो मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और अन्य सक्षम न्यायिक मंचों के समक्ष ले जाया जाएगा।

नोट: यह जानकारी भारतीय जनाधिकार पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष दीपक दुबे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। परियोजना प्रबंधन या संबंधित विभागों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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