
रायपुर, 24 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने राज्य के पारंपरिक कोसा वस्त्रों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए नवाचार, आधुनिक डिजाइन और मूल्य संवर्धन पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बुनकरों की आर्थिक मजबूती के लिए कोसा साड़ी, शाल और गमछा को बाजार की मांग के अनुसार और अधिक आकर्षक व किफायती बनाना आवश्यक है।
लोकभवन में कोसा वस्त्रों का अवलोकन करते हुए राज्यपाल ने सुझाव दिया कि डॉबी और जैकार्ड तकनीक का उपयोग कर नए डिजाइन विकसित किए जाएं, जिससे इन पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नई पहचान मिल सके।
उन्होंने असम के सुवालकुची जैसे प्रमुख रेशम केंद्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर उनके लोकप्रिय डिजाइन तत्वों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में शामिल करने की बात कही। इससे राज्य के बुनकरों को नए अवसर और बेहतर आय मिल सकेगी।
राज्यपाल ने कोसा साड़ियों को अधिक किफायती बनाने के लिए बॉडी और बॉर्डर को अलग-अलग तैयार कर आधुनिक शैली में उत्पादन करने का सुझाव दिया। साथ ही एक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न जैसे नए धागों के उपयोग से आकर्षक मोटिफ और डिजाइन विकसित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक माह के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए तथा ग्रामोद्योग विभाग किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार करे।
बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव एम. एम. जोशी, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बुनकर सेवा केंद्र रायगढ़ के उपनिदेशक विजय सावनेरकर सहित कई विशेषज्ञ और डिजाइनर उपस्थित रहे।





