छत्तीसगढ़

JANJGIR CHAMPA TRAIN ACCIDENT : 14 सितंबर 1997 का वो खौफनाक मंजर, जब चांपा के पुल में गिरी थी हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस

1997 - हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस के पांच डिब्बे मध्य भारत में एक पुल से नदी में गिर गयी और कम से कम 81 लोग मारे गए और लगभग 200 से अधिक घायल हो गए। छत्तीसगढ़ राज्य के पूर्व में चांपा शहर के पास एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे नदी में गिर गए। लगभग 300 से अधिक यात्रियों को ले जा रहे चार डिब्बे और एक मालवाहक गाड़ी हंसदेव नदी में गिर गई। पांच डिब्बे इंजन के पीछे थे और उनमें से एक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। कोलकाता जाने वाली ट्रेन के डिब्बे एक पुल से नदी में गिर गए। ट्रेन का इंजन और एक डिब्बा पुल से लटक गया। गिरी हुई गाड़ियों में से एक पूरी तरह से तब कुचल गई जब दूसरी गाड़ी उस पर गिर गई। पुलिस ने कहा कि तोड़फोड़ का संदेह नहीं था।

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जांजगीर-चांपा / छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में आज से ठीक 27 साल पहले आज ही के दिन यानी 14 सितंबर 1997 को जब पूरा चांपा शहर गणेश उत्साह में डूबा था, तभी शाम चांपा से एक ऐसी खबर आई, जिससे पूरा देश दहल गया। हसदेव रेलवे पुल चांपा में अहमदाबाद एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होकर नदी में गिर गई। ट्रेन की पांच बोगी के दुर्घटनाग्रस्त होने से सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए।

इस दुर्घटना में मरने वालों की अधिकारिक पुष्टि भले ही 81 की जाती है, लेकिन वास्तव में सैकड़ों लोग दुनिया से अलविदा कह गए। इधर, इस भयंकर दुर्घटना की खबर मिलते ही चांपा शहर के लोग जिस स्थिति में थे, उसी स्थिति में पुल की ओर घायलों की मदद करने भागे। सैकड़ों घायलों को तुरंत सरस्वती शिशु मंदिर, लायंस स्कूल, बीडीएम चिकित्सालय चांपा में त्वरित उपचार के लिए भर्ती किया गया। लायंस क्लब, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चांपा सेवा संस्थान, अक्षर साहित्य परिषद, स्वर्णकार समाज, देवांगन समाज, अग्रवाल समाज, प्रगतिशील स्वर्णकार संघ के अतिरिक्त अन्य संगठनों ने तन, मन, धन से दुर्घटनाग्रस्त लोगों की सहायता की तो वहीं घर-घर से भोजना इत्यादि की व्यवस्था की गई थी। नगर के लोगों ने बताया कि 14 सितंबर की 27 वर्ष पहले की वह दर्दनाक हादसा, लोगों की चीख-पुकार और हसदेव नदी के पुल के ऊपर दो बोगियां लटक रही थी। उसमें बैठे लोगों की चीख-पुकार मची हुई थी। राहत कार्य मे लगे लोगों ने ट्रेन में फंसे लोगों को बाहर निकाला और उन्हें आवश्यक उपचार के लिए निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चांपावासियों ने तन, मन, धन से सेवाएं की। इतना ही नहीं उनकी आत्मा की शान्ति के लिए अनुष्ठानिक कार्य भी किया गया था।

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने जो आज भी रेलवे स्टेशन चांपा में फलों का व्यवसाय करते हैं। वे उसी दिन उसी एक्सप्रेस ट्रेन से बिलासपुर से चांपा आ रहें थे। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन के हसदेव नदी पर पहुंचते ही जोर की आवाज़ हुई और सीने में जोर की चोट लगी और वह बेहोश हो गया। जब वो होश में आया तब बिसाहूदास महंत अस्पताल के बेड में अपने आप को पाकर भयभीत हो गया। उन्होंने कहा कि उस खौफनाक मंजर की याद आते ही तन बदन सिहर उठता है।

चांपा नगर का गणेशोत्सव छत्तीसगढ़ अंचल में सुप्रसिद्ध है। इस घटना के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी चांपा में गणेशोत्सव अत्यंत सादगीपूर्वक मनाया जाता है। अधिकतर लोगों से पूछताछ करने पर लोग इस खौफ़नाक मंज़र का दृश्यम बताने में हिचकते हैं और उनका दिल को दहल जाता है।

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