हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद धार्मिक आयोजन और प्रार्थना सभा के लिए प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धार्मिक आयोजनों और प्रार्थना सभाओं को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। रिट अपील 507/2026 की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व आदेश को अप्रभावी रखते हुए प्रशासनिक अनुमति को आवश्यक माना है।
जांजगीर-चांपा/बिलासपुर। निजी मकानों में धार्मिक सभा और प्रार्थना आयोजन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। शासन की ओर से दायर रिट अपील क्रमांक 507/2026 पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने 22 जून 2026 को पूर्व में पारित आदेश को वर्तमान अपील के अंतिम निराकरण तक अप्रभावी (स्टे) रखने का निर्देश दिया है।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम गोधना निवासी बद्री प्रसाद साहू द्वारा दायर रिट याचिका क्रमांक 1281/2026 से जुड़ा है। इस याचिका में 24 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा जारी नोटिस तथा पंचायत से अनुमति लेने की अनिवार्यता संबंधी प्रावधानों को खारिज कर दिया था। उक्त आदेश में निजी मकानों में धार्मिक सभा आयोजित करने के लिए प्रशासनिक अनुमति की आवश्यकता नहीं मानी गई थी।
हालांकि, राज्य शासन ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट अपील क्रमांक 507/2026 प्रस्तुत की। अपील पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए 24 मार्च 2026 के आदेश के प्रभाव को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
इस अंतरिम आदेश के बाद वर्तमान स्थिति में किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन, प्रार्थना सभा या धार्मिक कार्यक्रम के लिए प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेना जरूरी माना जाएगा। साथ ही पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यकतानुसार नोटिस जारी किए जा सकते हैं। आदेश के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि छत्तीसगढ़ सार्वजनिक धार्मिक भवन तथा स्थान विनियामक अधिनियम, 1984 के प्रावधानों के तहत किसी भी भवन या स्थान में धार्मिक प्रार्थना अथवा सभा के आयोजन के लिए प्रशासनिक अनुमति आवश्यक है।
मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।





